सूचना के अधिकार का भारत में स्थिति (Right to Information – Position in India):
भारत के संविधान में ऐसा कोई प्रत्यक्ष प्रावधान नहीं जो नागरिकों को सूचना का अधिकार प्रदान करता हो परंतु 1975 से सर्वोच्च न्यायालय यह कहता रहा है कि सूचना का अधिकार भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है जिसकी गारंटी भारत के संविधान की धारा 19 (1)(a) में दी गई है ।
भारत में सरकारी सूचना को जनता के सामने सार्वजनिक करने पर विभिन्न कानून और नियम प्रतिबंध लगाते हैं और इस प्रकार प्रशासन में गोपनीयता की हिमायत करते हैं:
(i) सरकारी गोपनीयता अधिनियम, 1923
(ii) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
(iii) जाँच आयोग अधिनियम, 1952
(iv) अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1954
(v) केंद्रीय लोक सेवा (आचरण) नियम, 1955
(vi) रेलवे सेवा (आचरण) नियम, 1956
पाँचवे वेतन आयोग (1994-97) ने सिफारिश की सरकारी गोपनीयता अधिनियम को समाप्त कर देना चाहिए और सूचना अधिकार अधिनियम को लाना चाहिए । 2005 में संसद ने ‘सूचना अधिकार अधिनियम पारित’ किया ।
इसके विभिन्न प्रावधान ये हैं:
1. प्रत्येक नागरिक को यह सरकारी अधिकारियों के अधीन ऐसी सूचना को हासिल करने की स्वतंत्रता देता है जो जनहित से मेल खाती हो ।
2. नागरिकों को सूचना का अधिकार प्रदान करके इसका लक्ष्य प्रशासन में खुलेपन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को प्रोत्साहित करना है ।
3. यह नागरिकों को अधिकार देता है कि वे विभिन्न योजनाओं, उनके कार्यान्वयन की अवस्था तथा अन्य संबंधित विवरण के बारे में सरकारी तंत्र से जानकारी हासिल कर सकें ।
4. नागरिकों के प्रार्थनापत्रों पर कार्यवाही करने के लिए एक अधिकारी की घोषणा करता है जिसका दर्जा उपजिलाधिकारी से कम न हो ।
5. इसमें कहा गया है कि किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति कार्यक्रम अधिकारी को एक निर्दिष्ट प्रपत्र भर कर देगा जिस पर वह सूचना एकत्र करने के कारण लिखकर देगा/देगी ।
6. इसमें आशा की गई है कि सरकार नागरिकों से प्रार्थनापत्र लेने के 30 दिन के भीतर सूचना उपलब्ध करा देगी ।
7. यह प्रत्येक सरकारी अधिकारी को बाध्य करता है कि वह सूचना उपलब्ध कराए और विधिवत सूचीकृत, अनुक्रमित तथा प्रकाशित कार्यवाही संबंधी आवश्यकता के अनुकूल सारे अभिलेख बनाए रखे ।
8. यह घोषित करता है कि निम्नलिखित प्रवर्गों की सूचनाओं को प्रकट नहीं किया जा सकता है:
(i) वह सूचना जिससे भारत की प्रभुसत्ता एवं अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो ।
(ii) मंत्रिमंडल के कागजात से संबंधित ।
(iii) अनुशंसाओं और पत्र व्यवहार वाले अंतरिक कार्य संचालन संबंधी कागजात ।
(iv) जिस सूचना से संसद या राज्य विधायिका के विशेषाधिकार का हनन होता हो ।
(v) वह सूचना जिससे केंद्र और राज्य के परस्पर संबंध प्रभावित हों ।
(vi) वह सूचना जो सरकारी अधिकारियों के प्रबंधन तथा कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हो ।
(vii) व्यापारिक या वाणिज्यिक गोपनीयता से संबंधित सूचना ।
(viii) वह सूचना, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हो ।

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